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आस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति का उद्घोष - देश के बाहर 11वें अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का भव्य शुभारम्भ
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण...
देसंविवि में यूरोपियन फिल्मोत्सव की भव्य शुरुआत - लोकरंजन से लोकमंगल की दिशा में शानदार पहल
हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आज यू...
उत्तराखंड राहत कार्यों में हुए शहीदों को दी श्रद्धांजलि, परिवारी जनों को सहयोग - २० शहीदों के परिवारों को दिया गया २-२ लाख रुपये का अनुदान 0
पश्चिम बंगाल में एक लाख घरों तक गुरुदेव को ले जाने का संकल्प |
०१-०४-२०१४ को आईडियल सेकेंडरी स्कूल (लेक टाउन ,कोलकाता...
समाज के नवोन्मेष के लिए समर्पित हुआ तन, मन, जीवन 0
नवरात्रि पर गुना शक्तिपीठ पर होगी विशेष साधना-
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Coming Brisbane(Australia) Ashwamedh Yagya 2014 0
शांतिकुंज में संस्कृति पुरोधा एवं प्रसारक शिविर परिवर्तित तिथियाँ ! 0
शांतिकुंज में नये शिविर !!
    प.पू. गुरुदेव ने शांतिकुंज को लोकशिक्षण की एक अकादमी के रूप में स्थापित किया है। जन-जन को मानव जीवन की गरिमा और उसके सदुपयोग की रीतिनीति का शिक्षण देना शांतिकुंज का प्रमुख उद्देश्य है। इसीलिए नौ दिवसीय ...
नवरात्रि में उपासना से जगेगी सुप्त चेतना
नवरात्रि को देवत्व के स्वर्ग से धरती पर उतरने का विशेष पर्व माना जाता है। उस अवसर पर सुसंस्कारी आत्माएँ अपने भीतर समुद्र मंथन जैसी हलचलें उभरती देखते हैं। जो उन्हें सुनियोजित कर सके वे वैसी ही रत्नराशि उपलब्ध करते हैं जैसी कि पौराणिककाल में उपलब्ध हुई मानी जाती है। इन दिनों परिष्कृत अंतराल में ऐसी उमंगे भी उठती हैं जिनका अनुसरण सम्भव हो सके तो दैवी अनुग्रह पाने का नहीं देवोपम बनने का अवसर भी मिलता है।Read more
नवरात्रि साधना से पूर्व कुछ सावधानियाँ समझ लें
आश्विन नवरात्रि के ठीक पूर्व प्रकृति का सर्वाधिक विलक्षण एवं विविधताओं वाला मौसम वर्षा ऋतु होता है। यह ऋतु अपने साथ हर्ष, उमंग और वर्षा की अनेक सुखद संभावनाएँ तो लाती ही है, पर साथ ही विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ तथा जन धन हानि जैसी परेशानियाँ भी साथ लाती है। अतिवृष्टि से जल-जंगल एक हो जाते हैं और चहुँ ओर जल प्रलय की-सी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे जन-धान्य के हानि के साथ ही जनहानि भी बहुत होती है। यों तो अपने देश के कुछ भाग को छोड़कर गर्मी के मौसम में ही वर्षा आरम्भ हो जाती है और सितम्बर - अक्टूबर तक चलती है। बरसात के दिनों में घर भी सीलन भरे रहते हैं। फलस्वरूप वायु दूषित हो जाती है। वातावरण की अनियमितता के कारण गीलेपन, उमस और सीलन भरी हवा के कारण शरीर की जठराग्नि मन्द हो जाती है और पाचन संस्थान गड़बड़ा जाता है। सर्दी, जुकाम, खाँसी, मलेरिया, डेंगू फीवर एवं वात व्याधि जैसी बीमारियों का सर्वाधिक प्रकोप इन्हीं दिनों होता है। ऐसी स्थिति में रहन सहन और खान-पान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। Read more
उठो ! हिम्मत करो
स्मरण रखिए, रुकावटें और कठिनाइयाँ आपकी हितचिंतक हैं। वे आपकी शक्तियों का ठीक-ठीक उपयोग सिखाने  के लिए हैं। वे मार्ग के कंटक हटाने के लिए हैं। वे आपके जीवन को आनंदमय बनाने के लिए हैं। जिनके रास्ते में  रुकावटें नहीं पड़ीं, वे जीवन का आनंद ही नहीं जानते। उनको जिंदगी का स्वाद ही नहीं आया। जीवन का रस उन्होंने ही चखा है, जिनके रास्ते में बड़ी-बड़ी कठिनाइयाँ आई हैं। वे ही महान् आत्मा कहलाए हैं, उन्हीं का जीवन, जीवन कहला सकता है।

उठो ! उदासीनता त्यागो। प्रभु की ओर देखो। वे जीवन के पुंज हैं। उन्होंने आपको इस संसार में निरर्थक नहीं भेजा। उन्होंने जो श्रम आपके ऊपर किया है, उसको सार्थक करना आपका काम है। यह संसार तभी तक दुःखमय दीखता है, जब तक कि हम इसमें अपना जीवन होम नहीं करते। बलिदान हुए बीज पर ही वृक्ष का उद्भव होता है। फूल और फल उसके जीवन की सार्थकता सिद्ध करते हैं।

सदा प्रसन्न रहो। मुसीबतों का खिल चेहरे से सामना करो। आत्मा सबसे बलवान है, इस सच्चाई पर दृढ़ विश्वास रखो। यह विश्वास सबसे बलवान है, इस सच्चाई पर दृढ़ विश्वास रखो। यह विश्वास ईश्वरीय विश्वास है। इस विश्वास द्वारा आप सब कठिनाइयों पर विजय पा सकते हैं। कोई कायरता आपके सामने ठहर नहीं सकती। इसी से आपके बल की वृद्धि होगी। यह आपकी आंतरिक शक्तियों का विकास करेगा।
                                    
                                     (पं. श्रीराम शर्मा आचार्य)
होली का त्यौहार कैसे मनाया जाय?
समाज में विशेष रूप से चार श्रेणियों के व्यक्ति दिखलाई पड़ा करते हैं ।। पहले प्रकार के व्यक्ति वे हैं, जो अपने स्वार्थ का ध्यान बहुत कम रखते हैं और अपनी शक्ति तथा साधनों का उपयोग संसार के हित के लिये करते हैं ।। दूसरी श्रेणी के मनुष्यों में शक्ति की अधिकता होती है ।। और वे उस बल का प्रयोग सज्जनों की रक्षा तथा दुष्टों के दमन में करते हैं ।। तीसरे व्यक्ति वे होते हैं, जो ज्ञान और शारीरिक शक्ति का अभाव होते हुये भी आर्थिक दृष्टि से सफल होते है, वे कृषि, पशु पालन और व्यापार द्वारा उचित ढंग से धन कमाकर समाज के अनेक अभावों को दूर करने में सहायक बनते हैं ।। चौथी श्रेणी उन मनुष्यों की होती है, जो ज्ञान, बल ओर धन से रहित होते हुये शारीरिक श्रम से समाज की अत्यन्त उपयोगी सेवा करते हैं ।। इन चारों प्रकार के मनुष्यों को हम भारतीय समाज के प्राचीन संगठन के अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के नाम से पुकार सकते हैं ।।Read more

Releases on the occasion of Vasant Parv :




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At a superficial level, the two streams of knowledge, Science and Spirituality, both aimed at finding the ultimate truth, appear to be contradicting and nullifying each other's principles..
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Indian Culture

Founded on sound spiritual, philosophical and scientific foundation the principles of Indian culture set the basis of ultimate evolution of the conscious faculties of humanity. Read More on Scriptures (Veda, Dharshan), Yoga, Ayurveda and fundamental philosophy in Indian Culture..
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