योग दिवस एवं व्यसन मुक्ति सप्ताह, 21-26 जून 2017

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अत्यंत हर्ष का विषय है कि ऋषियों की महानतम धरोहर योग की महत्ता को स्वीकार करते हुए पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2015 से 21 जून को ''अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस" के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है।

भारतीय संस्कृति ने सदैव से ही सबके हित और सबके सुख की कामना की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी शारीरिक, मानसिक, आत्मिक और सामाजिक स्तर पर संतुलित जीवन को समग्र स्वास्थ्य माना है। इन चारों आधारों पर मानवीय स्वास्थ्य को स्थिर रखने की क्षमता योग में है। इसी आधार पर प्राचीन काल में भारत समर्थ राष्ट्र एवं जगद्गुरु रहा है। इन दिनों अधिकतर योग का प्रचलन शारीरिक संदर्भ में ही हो रहा है, परन्तु इसे समग्र जीवन की सफलता के मार्ग के रूप में आगे ले जाने की आवश्यकता है। ऋषियों ने इसे एक समग्र जीवन शैली के रूप में ही हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है। इसका लक्ष्य मात्र रोगोपचार नहीं, वरन् आरोग्य की रक्षा और समग्र विकास है।

भगवद्गीता के अनुसार-''योग: कर्मसु कौशलम्" अर्थात् कर्म की कुशलता योग है। योग के अनुसार यह कुशलता शारीरिक व्यायाम से लेकर अन्त:करण के शोधन तथा आत्मा-परमात्मा के मिलन-संयोग तक ले जाने में समर्थ होती है। ईश्वर सद्गुणों का समुच्चय है, अत: योग हमें सद्गुणों से सम्पन्न सत्कर्मशील बनने की तथा निष्काम कर्म करने की कुशलता प्रदान करता है, साथ ही स्वस्थ-समृद्ध जीवन से महामानव स्तर तक विकसित करता है।

''योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:" अर्थात् चित्तवृत्तियों को अनुशासित रखना योग है। चित्तवृत्तियों की उथल-पुथल को रोककर योग हमारी प्रज्ञा-दूरदर्शी विवेकशीलता का जागरण करता है। यम-नियम के वैयक्तिक और सामाजिक अनुशासन के पालन से लेकर धारणा, ध्यान और समाधि की यौगिक जीवन शैली तथाकथित आधुनिक विकसित कहे जाने वाले मनुष्य के सामने खड़ी अनेकानेक समस्याओं का सार्वभौमिक समाधान है। मनुष्य के चिन्तन का दुष्प्रवृत्तियों से सम्बद्ध हो जाना कुयोग है और सत्प्रवृत्तियों से सम्बद्धता सुयोग है। योग हमारे जीवन को कुयोग से बचाकर सुयोग की ओर बढऩे का मार्ग प्रशस्त करता है।

ऋषियों की इस अनुपम देन को विज्ञान और अध्यात्म दोनों का भरपूर समर्थन प्राप्त है। आज योग विश्व पटल पर एक उत्कृष्ट जीवन शैली के रूप में प्रतिष्ठित है। व्यक्तिगत जीवन में स्वास्थ्य और संस्थागत जीवन में आदर्श प्रबंधन के रूप में योग का प्रयोग इन दिनों हो रहा है। रोगोपचार से लेकर गहन समाधि की उच्चतम अवस्था योग से सम्भव है। योग एक निरापद एवं अचूक प्रयोग है।

स्वामी विवेकानंद एवं महर्षि अरविंद ने योग को जीवन का आधार माना है। इसी क्रम में युगऋषि पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने स्वयं योगमय जीवन जिया और करोड़ों व्यक्तियों को योग के पवित्र व्यावहारिक मार्ग पर आगे बढ़ाया है।

भारत की पहल पर योग को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, अत: आईये ! हम-सब मिलकर इसे व्यापक बनाने की जिम्मेदारी भी उठायें। सच्चे योग साधक बनें, जीवन की शक्तियों को कुयोग से बचायें-सुयोग में लगायें।
 

Date Program
16-20 जून शालाओ में, समस्त शक्तिपीठों पर 16 से 20 जनसंपर्क- पत्रक देना एवं पुस्तक- योग समग्र स्वास्थ प्रबंधन, योग आसन प्राणायम, नशा मुक्ति संदेश का पत्रक देना
21 - जून
योग दिवस
21 जून की प्रात: प्रार्थना, संदेश, योग, संकल्प, शांति पाठ। प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य होगा।
22 - जून नशा मुक्ति अभियान हेतु जन संम्पर्क प्रारम्भ
नशा मुक्ति फिल्म का प्रदर्शन, शालाओं एवं कालेजों में एवं मण्डल, सहयोगी संगठनों में
23 - जून शालाओं एवं कालेजों में नशे पर सम्भाषण (प्रथम- द्वितीय- तृतीय पुरस्कार)
  1. नशा और समाज          4.  नशा और मानस, मन           6. नशा और परिवार
  2. नशा और स्वास्थ         5.  नशा और राष्ट्र                 7. नशा और अर्थशास्त्र
  3. नशा और धर्म
24-25 - जून शाला और कालेजों में नशे से बचने एवं छोडऩे के उपाय बताना इस हेतु जन जागरण हेतु पत्रक वितरण करना।
नुक्कड़ नाटक,गीत, नारे शालाओं एवं कॉलेज के युवाओं द्वारा नारे- ये उदाहरण हेतु हैं, अन्य कोई व्यसन मुक्ति के नारे भी ले सकते हैं-
  1. सोचो समझो बचो नशे से जीवन जियो बड़े मजे से
  2. नशा नाश की जड़ है भाई इसका फल अतिशय दुखदाई
  3. नशा नाश का दूजा नाम तन मन धन तीनों बेकाम
  4. नशा बना के मालामाल। करने वाले हो कंगाल॥
  5. देश का युवा करे पुकार। व्यसन की आदत सबसे बेकार॥
  6. व्यसन मुक्त यह देश बनाओ स्वस्थ भारत का उद्घोष जगाओ॥
  7. हम सबने यह ठाना है। व्यसन मुक्त राष्ट्र बनाना है॥
26 - जून जिले स्तर पर रैली एवं संकल्प
जन- जन का हो यह संदेश व्यसन मुक्त हो भारत देश॥
युवा संकल्पित होकर दे रहे संदेश नशा मुक्त हो हमारा देश॥

26 को नगर स्तर की व्यसन मुक्ति रैली, समापन पर योग युक्त-व्यसन मुक्त भारत का संकल्प, शाम को सुविधानुसार व्यसन मुक्ति दीप यज्ञ, फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन अंत में शान्तिपाठ।



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