
प्रखर साधना वर्ष-1999
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ऐसे अद्भुत पल आते हैं, जब स्वयं महाकाल वासन्ती बयार बनकर मनुष्यों को अपना अहसास कराते हैं और तब हमारे वैयक्तिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन पर परम प्रभु की मधुर सुवास फैल जाती है, जबकि सामान्य समय में वह अपनी चेतना समेट लेते हैं और मनुष्य अपने अहंकार की शक्ति या अशक्ति से काम करने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। इन विशिष्ट पलों में थोड़ी-सी भी साधना महान परिणाम उत्पन्न करती है, जबकि सामान्य समय में थोड़ा-सा परिणाम उत्पन्न करने के लिए भी वर्षों और जन्मों तक कठोर तप करना पड़ता है।
नववर्ष 1999 का हर पल ऐसा ही अद्भुत एवं विशिष्ट है, तभी अध्यात्म-चेतना के ध्रुव केन्द्र देवात्मा हिमालय से इसे प्रखर साधना वर्ष के रूप में मनाए जाने का निर्देश अवतरित हुआ है। भगवान महाकाल की रोमांचकारी लीलाएँ इस समूचे वर्ष में देखी जा सकेगी। इस वर्ष के हर पल में नवयुग के आगमन की पग ध्वनि तीव्र से तीव्रतर होती जाएगी।
धन्य हैं, वे जो प्रखर साधना वर्ष 1999 का महात्म्य आत्मसात् करने के लिए प्रतिपल तत्पर हैं। इस साधना वर्ष में धो डालें अपनी अन्तरात्मा से समस्त आत्मप्रवंचना, ढोंग और थोथी आत्मप्रशंसा की वृत्ति को, ताकि सीधे देख सकें अपनी मार्गदर्शक गुरुसत्ता को और सुन सकें उस वाणी को जो सतत् पुकार रही है। इस वर्ष के विशिष्ट पलों में हटा दें अपनी सारी कुटिलता को जो पहले हमें परमपूज्य गुरुदेव की दृष्टि और आदर्श की ज्योति से विमुख किए हुए थी क्योंकि यह कुटिलता यदि अब भी बनी रही तो इस वर्ष की विषमताओं के प्रहारों से कोई भी बच सकेगा। यदि किसी तरह बच भी गया तो भी महाकाल का कालदण्ड उसे उसकी दुष्प्रवृत्तियों का दण्ड देकर ही रहेगा। यह महान वर्ष एक बवण्डर, एक तूफान की तरह से शक्ति के बल पर खड़ा रह सकता है, हम सबके लिए ही नहीं, समस्त मानवता के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनेगी। समस्त उनकी शक्ति से कार्य कर सकें।
इसमें भागीदार प्रत्येक साधक के लिए यही महान सन्देश है-
वह अग्नि वह सूर्य वह समुद्र बन जाओ।
महाकाल की बनो महत्ता युगाकाश पर छा जाओ॥