HOLI
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। खीज-क्रोध से उन्मत्त हिरण्यकश्यप जब स्वयं उसे मारने दौड़ा, तो नृसिंह भगवान ने प्रकट होकर उसे समाप्त कर दिया। इस कथा की महान प्रेरणाओं को होली के यज्ञीय वातावरण में उभारा जाना उपयुक्त है।
यह राष्ट्रीय चेतना के जागरण का पर्व है। जहाँ वर्गभेद है, वहाँ समस्त साधन होते हुए भी क्लेश और अशक्तता ही रहेगी; जिनमें भ्रातृत्व सहकार है, वे अल्प साधनों में भी प्रसन्न और अजेय रहेंगे, इसलिए इसे समता का पर्व भी मानते हैं। कार्य-विभाजन के लिए किए गए चार प्रमुख वर्गों को महत्त्व देने की परंपरा रखी गई है। होली पर्व में शुद्र वर्ग को...
हमारी होली (होली विशेषांक— 1)
मैं चाहता हूँ कि आप इस होली पर खूब आनंद मनाएँ और साथ ही यह भी चिंतन करें कि जिसकी यह छाया है, उस अखंड आनंद को मैं कैसे प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी युग-युग की प्यास कैसे बुझ सकती है? इस अँधेरे में कहाँ से प्रकाश पा सकता हूँ, जिससे अपना स्वरूप और लक्ष्य की ओर बढ़ने का मार्ग भली प्रकार देख सकूँ ? सच्चे अमृत को मैं कैसे और कहाँ से प्राप्त कर सकता हूँ ?
आइए, उस अखंड आनंद को प्राप्त करने के लिए हृदयों में होली जलावें। सच्चे ज्ञान की ऐसी उज्ज्वल ज्वाला हमारे अंतरों में जल उठे, जिसकी लपटें आकाश तक पहुँचें। अंतर के कपाट खुल जावें और उस दीप्त प्रकाश में अपना स्वरूप परख सकें। दूसरे पड़ोसी भी उस प्रकाश का लाभ प्राप्त करें। चिरकाल के जमा हुए झाड़-झंखाड़ इस होलिका की ज्वाला में जल जावें। विकारों के राक्षस, ...
