भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक पुनर्जागरण की दिशा में एक सशक्त पहल
‘इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (IKS)’ 7-दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में 1 से 7 मार्च 2026 तक आयोजित ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (IKS)’ विषयक 7-दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आज विधिवत शुभारंभ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
यह विशेष कार्यशाला देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों एवं संस्थागत चिंतकों के लिए समर्पित है, जिनमें प्रमुख रूप से—
• प्रो. पी. के. पात्रा — कुलपति, पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज़ एवं आयुष विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़
• प्रो. टी. सी. तारानाथ जी — कुलपति, हसन विश्वविद्यालय
• प्रो. आनंद सरडा देशपांडे जी — कुलपति, बागलकोट विश्वविद्यालय
• डॉ. रश्मि रानाडे जी — निदेशक, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंस, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय
• डॉ. एस. संगीता — विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर, समाज विज्ञान विभाग, तमिल विश्वविद्यालय
• डॉ. एस. कविता — प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, भारतीय भाषाएँ एवं तुलनात्मक साहित्य अध्ययन, तमिल विश्वविद्यालय
की गरिमामयी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
अपने उद्घाटन संबोधन में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता, प्रासंगिकता और वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, अपितु भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाली जीवनदृष्टि है। यज्ञ, योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक चेतना एवं सतत विकास जैसे आयामों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ समन्वित करना समय की अनिवार्यता है।
यह कार्यशाला सहभागियों को भारतीय ज्ञान-विज्ञान की मूल भावना से जोड़ते हुए, आध्यात्मिकता और विज्ञान के समन्वित दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप में अनुभव करने का अवसर प्रदान करेगी। विविध शैक्षणिक संवाद, अनुभवात्मक सत्र एवं शोध केंद्रों के अवलोकन के माध्यम से यह कार्यक्रम शिक्षा-जगत में एक नए विमर्श को गति देगा।
Recent Post
विज्ञान ने समस्याएँ सुलझाई कम, उलझाईं अधिक
विज्ञान की एक शाखा रसायनशास्त्र ने लाखों-करोड़ों कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों की खोज कर ली। इतनी औषधियाँ बन चुकी हैं कि डॉक्टर उन सबको याद भी नहीं रख सकता। जीव विज्ञान ने यहाँ तक पहल...
विज्ञान और उसकी अस्थिरता
ईसा से 200 वर्ष पूर्व नीसिया के वैज्ञानिक ‘हिप्पार्कस’ ने बताया कि, “ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। अन्य ग्रह-उपग्रह उसके चारों ओर केंद्रीय शक्ति (एक्...
विज्ञान की अपूर्णताएँ
विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, ...
विज्ञान की अपूर्णता और स्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है...
विज्ञान की अपूर्णता और अस्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है। इस परिधि को किसी प्रकार कम ...
नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्कार /गायत्री मंदिर पर रामनवमी पर्व पर पर होगा पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन
*नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्कार*
*गायत्री मंदिर पर रामनवमी को होगा पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन*
संवाद सूत्र: पचपेड़वा/गैंसड़ी <...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है&mdas...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल्पों की महान् पूर्णाहुति
हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे...
