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दरियावगंज में दीप महायज्ञ की पावन ज्योत से हुआ आध्यात्मिक जागरण का साक्षात्कार
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के लिए विख्यात दरियावगंज, जनपद–कासगंज आज एक विशेष अध्याय का साक्षी बना। 151 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित दीप महायज्ञ में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को आस्था की एक नई ऊर्जा से भर दिया।
डॉ. पंड्या जी सर्वप्रथम मझोला स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुँचे, जहाँ उन्होंने माँ गायत्री के दर्शन एवं आरती कर वहां उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की। इसके बाद वे महायज्ञ स्थल, सहरी तिराहा, घुमरी रोड, कक्षा थाना, दरियावगंज पहुँचे, जहाँ दीप महायज्ञ में सम्मिलित हुए।
डॉ. पंड्या जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में पूज्य गुरुदेव के विचारों को उजागर करते हुए समाज के आत्मसुधार की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला। डॉ. पंड्या जी ने मानव जीवन को सार्थक बनाने का संदेश देते हुए कहा, “अपने दीपक आप स्वयं बनें, ताकि आपके जीवन का प्रकाश समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि दीपमहायज्ञ जैसे आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के जागरण का माध्यम हैं, जहाँ हम एक साथ मिलकर अपनी ऊर्जा को शुद्ध और दिव्य उद्देश्यों के लिए समर्पित करते हैं। वातावरण की पवित्रता और शुद्धि के लिए यज्ञों का आयोजन किया जाना अतिआवश्यक है।
इस महायज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने अपनी आहुतियों के साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की आकांक्षा प्रकट की। अंत में कार्यक्रम में आए हुए सभी समाजसेवी, मंत्रीगण एवं विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए उनका सम्मान किया गया।