
सनातन नववर्ष उत्सव: विक्रम संवत 2082 की दिव्य छटा
विक्रम संवत 2082 के स्वागत में दिल्ली के चिन्मय मिशन वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में 29 मार्च 2025 को आयोजित सनातन नववर्ष समारोह भव्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आभा से आलोकित हुआ। यह दिव्य आयोजन भारतीय संस्कृति की गहराइयों को पुनः जाग्रत करने वाला एक प्रेरणास्पद संगम बना।
इस शुभ अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का शुभागमन हुआ, जिन्होंने अपने प्रभावशाली उद्बोधन से सभी को नई चेतना और संकल्प शक्ति से ओतप्रोत कर दिया।
डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा भारत भूमि की स्वर्ण गाथा सदियों से चली आ रही है। यह वही भूमि है जिसने अनेक महापुरुषों को जन्म दिया है। यह भारत की सनातन भूमि है, जिसे न काटा जा सकता है, न बांटा जा सकता है।
हमें मनुष्य जन्म मिला है, और यह हमारा सबसे बड़ा सौभाग्य है। मनुष्य का जन्म इसी लिए मिला है कि हम अपने जीवन के मूल्य को समझें और सनातन धर्म की रक्षा में अपना योगदान दें।
मनुष्य का अहंकार ही उसकी सारी उपासना और समाधि को नष्ट कर देता है। मनुष्य का अहंकार और लालच ही उसे आगे बढ़ने से रोकते हैं। नवसंवत्सर वह अवसर है जो मनुष्य के सौभाग्य को जगाने के लिए आता है।
इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित स्वामी विशालानंद जी और स्वामी प्रेम अन्वेषी जी का सम्मान किया गया, जिन्होंने अपने सारगर्भित विचारों से समस्त सभा को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत किया।
संस्कृति और अध्यात्म के इस महासंगम में वेद मंत्रों की गूंज ने पूरे परिसर को ऊर्जा से भर दिया।